श्री ब्रहमावर्त विद्वत्परिषद् की प्रथम बैठक संस्कार लान में सम्पन्न हुई।

समय व्यूज सुरेंद सोनी

कानपुर _श्री ब्रहमावर्त विद्वत्परिषद् की प्रथम बैठक संस्कार लान में सम्पन्न हुई। आप को बताते चलें दिनांक 19 अगस्त 2026 दिन बुधवार को श्री ब्रहमावर्त विद्वत्परिषद् की प्रथम बैठक संस्कार लान एच व्लाक किदवई नगर कानपुर में थी पद्मेश दुबे की संरक्षता एवं आचार्य ओंकार तिवारी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इस बैठक में

सर्वप्रथम श्री ब्रहमावर्त विद्वत्परिषद् की कार्यकारिणी का गठन किया गया तथा परिषद को सुव्यवस्थित रूप से संचालन हेतु सर्वसम्मति से पदाधिकारियों के दायित्वरूप पदों की घोषणा की गयी। वही आचार्य मुरारी अवस्थी ने पदों की घोषणा की और सभी सदस्यों ने सहमति प्रदान किया। परिषद् के श्रीराम जी त्रिपाठी परिषद के अध्यक्ष आचार्य ओंकार नाथ तिवारी तथा संरक्षक के रूप में श्री पदमेष दुबे की घोषणा की गयी। इसी क्रम में अमरेशमिश्रा, उमेशदत्त शुक्ल भोलानाथ शुक्ल की घोषणा भी संरक्षक पद पर की गयी। वरिष्ठ उपाध्यक्ष पटवर्धन जी, कार्याध्यक्ष श्री कमलेश शुक्ल उपाध्यक्ष पद पर आचार्य मुरारी का नाम प्रस्तावित किआ गया। महामन्त्री आचार्य चन्द्र प्रकाश त्रिपाठी मंत्री रामगोपाल मिश्र संयुक्त मंत्री केशव देव गौड व अरुण कुमार त्रिपाठी, संगठनन् मन्त्री श्री राजकिशोर त्रिपाठी कोषाध्यक्ष. आचार्य विदुर पाण्डेय, प्रचार एवं मीडिया प्रभारी कुमार गैरव शुक्ल, विधि सलाहकार वृज विहारी गौड़ के नाम -उद्घोषित किये गये। अन्य सभी विद्वान परिषद् में सदस्य के रूप में विद्यमान रहेंगे। अग्रिम बैठकों में उक्त पदाधिकारियों की सहमति से अन्य आचार्यों को दायित्व देने की योजना बनायी जायेगी। बैठक में परिषद् के आगामी धार्मिक, सांस्कृति एवं विद्वत सेवा सम्बन्धी कार्यक्रमों की रूपरेखा निश्चित कराई गई, जिसके संबंध में सभी विद्वानों के मध्य विचार विमर्श किया गया आचार्य पद्मेश दुबे जी की उपस्थिति में उनके सानिध्य एवं मार्गदर्शन में कार्यकारीणी के गठन एवं परिषद् की मानी गतिविधियों को सुव्यवस्थित संचालन हेतु निर्णय लिय गये। विशेष रूप से सरवानी श्रावणी (उपाक्रम) हरीतालिका व्रत श्री गणेश चतुर्थी वृत धार्मिक व्रतों एवं सनातन पद्धति के आधार पर मनने पर बल दिया गया। वही सभी वक्ताओं ने श्री ब्रहमावर्त विद्वत्परिषद् समृद्धि , वैदिक सनातन एवं विद्वानों को एक मंच प्रदान करना है। वही कार्यकम का उद्घाटन शुभ दीप प्रज्वल कर हुआ। कार्यक्रम का संचालन अरुण त्रिपाठी ने किया। अन्त में धन्यवाद ज्ञापन आचार्य चंद्र प्रकाश त्रिपाठी ने किया तथा शांति सम्मेलन समापन विदुर पांडे ने किया
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