ब्रह्मानंद कॉलेज में “मानव कल्याण में जीव विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी की उभरती भूमिका” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया

समय व्यूज गौरव प्रजापति

कानपुर_ब्रह्मानंद कॉलेज में “मानव कल्याण में जीव विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी की उभरती भूमिका” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया आप को बताते चलें दिनांक 17. 3.2026 दिन मंगलवार को ब्रह्मानंद कॉलेज, कानपुर द्वारा आज “मानव कल्याण में जीव विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी की उभरती भूमिका” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय के प्रज्ञा-मंडप सभागार में किया गया। इस संगोष्ठी को सी०एस० जे०एम० विश्वविद्यालय, कानपुर का सहयोग प्राप्त था। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति प्रोफेसर (डॉ०) सुधीर कुमार अवस्थी जी थे। उद्घाटन सत्र में अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और श्रोताओं का स्वागत करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ०) विवेक द्विवेदी ने शोध-युग की

चुनौतियों का सामना करने के साहस और संकल्प की चर्चा की और व्यवहारिक शोध से होने वाले विकास के लाभों की ओर ध्यान आकर्षित किया। वहीं मुख्य अतिथि प्रोफेसर अवस्थी जी ने जैव विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी की स्वास्थ्य, कृषि, औद्योगिक आदि क्षेत्रों में उत्तरोत्तर बढ़ती भूमिका, राष्ट्रीय और वैश्विक संदर्भों में, को इग्नोर न करने को चेताया। वही इस संगोष्ठी में की-नोट वक्तव्य बी०बी०ए० विश्वविद्यालय लखनऊ के प्रोफेसर नवीन कुमार अरोरा ने दिया। अपने भाषण में प्रोफेसर अरोरा ने कृषि योग्य दूषित मिट्टी के सुधार में सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने अनुपयोगी मिट्टी के पुनर्स्थापन में नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणुओं और माइकोराइजा की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने “प्रयोगशाला से भूमि-Lab to Land” तक वैज्ञानिक विकास के प्रसार के महत्व पर बल दिया।
संगोष्ठी दो तकनीकी सत्रों में आयोजित की गई, जिसमें सी०एस० जे०एम० विश्वविद्यालय, कानपुर की प्रोफेसर वर्षा गुप्ता ने इस बात पर प्रकाश डाला कि शरीर की रक्षा प्रणाली “स्वयं और गैर-स्वयं के बीच अंतर करने में कब और कैसे विफल रहती है। एक अन्य आमंत्रित वक्ता प्रोफेसर राम नारायण ने मानव पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में अपरंपरागत कृषि पद्धतियों की भूमिका पर चर्चा की, जो भोजन-पूर्ति के साथ-साथ औषधीय लाभ भी प्रदान कर सकती हैं। उन्होंने मानव आहार पूरक के रूप में ऑयस्टर मशरूम की संभावित भूमिका पर भी चर्चा की।
तकनीकी सत्र में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से कुल 35 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सेमिनार के विभिन्न उप-विषयों पर शोधकर्ताओं द्वारा समानांतर पोस्टर प्रस्तुति का भी आयोजन किया गया। शोधकर्ताओं द्वारा कुल 45 पोस्टर प्रस्तुत किए गए। वही आई०आई०पी०आर० कानपुर के डॉ० अरविंद कुमार कोंडा ने मानव जीवन को बेहतर बनाने में जैव प्रौद्योगिकी के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर अलका तांगड़ी ने किया। आयोजन समिति में उप-प्राचार्य प्रो० नवनीत मिश्रा, संयोजक प्रो० पंकज पांडे, डॉ० मधु सहगल और डॉ. रविंद्र स्वरूप सिंह शामिल थे। प्रोफेसर अरविंद पाण्डेय,डीन स्टूडेंट्स वेल्फेयर प्रोफेसर सुनील सिंह, चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर ऋता अवस्थी, प्रोफेसर अर्चना पाण्डेय, प्रोफेसर ए० एल० पाठक, डॉ० अमित, डॉ० शैलेन्द्र, डॉ० शचीन्द्र त्रिपाठी और अन्य शिक्षक तथा महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।





