प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को एक महिला जांच अधिकारी को शाम चार बजे तक कोर्ट की कस्टडी में रहने और आर्मी वेलफेयर फंड में पांच हजार रुपये जमा करने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने आरोपी की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया। महिला आईओ ने माना कि वह पॉक्सो एक्ट के केस में आरोपी का मोबाइल गलती से नहीं ले पाई थी। इस मामले में एक नाबालिग लड़की की अश्लील तस्वीर/वीडियो को एडिट कर सोशल मीडिया पर अपलोड करने का आरोप है। मुकदमे में आरोपी पर बीएनएस, पॉक्सो एक्ट और यूपी धर्मांतरण निषेध एक्ट 2021 के तहत आरोप हैं। कोर्ट ने पहले कहा था कि बीएनएस की धारा 183 के तहत दर्ज पीड़िता के बयान में सोशल मीडिया पर एडिटेड इमेज/वीडियो अपलोड करने के आरोप थे, लेकिन जांच अधिकारी ने जांच के लिए आरोपी का मोबाइल बरामद नहीं किया था। इसलिए कोर्ट ने कानपुर देहात के मूसानगर थाने की विवेचक अमिता वर्मा को पेश होने का निर्देश दिया। शनिवार को कोर्ट में हाजिर आईओ अमिता वर्मा ने माना कि वह गलती से आरोपी का मोबाइल लेने में नाकाम रहीं। उन्होंने आगे कहा कि कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के बाद वह एक सह-अभियुक्त की लंबित जांच के दौरान मोबाइल लेने की कोशिश कर रही थीं। उनके जवाब पर विचार करते हुए कोर्ट ने पंकज बनाम यूपी राज्य में अपने फैसले का जिक्र किया, जिसमें डीजीपी को ऐसे मामलों में आरोपियों का मोबाइल जमा करने के लिए सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट के आदेश के अनुसार डीजीपी ने इस साल जुलाई में सभी पुलिस अधिकारियों को सर्कुलर जारी किया था। इस पर कोर्ट ने कहा कि आईओ की गलती न सिर्फ जांच में लापरवाही दिखाती है, बल्कि बीएनएसएस की धारा 183 के तहत दर्ज पीड़िता के बयान के हिसाब से मोबाइल की अहमियत को देखते हुए अवमानना भी है। हालांकि कोर्ट ने नरम रुख अपनाते हुए जांच अधिकारी के खिलाफ कोई सख्त टिप्पणी करने से परहेज किया और भविष्य में सावधान रहने को कहा। कोर्ट ने इस लापरवाही पर नाराजगी जाहिर की, लेकिन नरम रवैया अपनाते हुए आईओ के महिला होने के नाते कोई सख्ती नहीं की। इसके बजाय उन्हें आर्मी वेलफेयर फंड में पांच हजार रुपये जमा करने और भविष्य में सावधान रहने का निर्देश दिया।






