इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, (नई दिल्ली), कानपुर ब्रांच एवं ब्रह्मानन्द कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका: समस्याएँ एवं सम्भावनाएँ) विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया

समय व्यूज गौरव प्रजापति

कानपुर _इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, (नई दिल्ली), कानपुर ब्रांच एवं ब्रह्मानन्द कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका: समस्याएँ एवं सम्भावनाएँ) विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया आप को बताते चलें दिनांक 30 मार्च, 2026 को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, (नई दिल्ली), कानपुर ब्रांच एवं ब्रह्मानन्द कॉलेज, मॉल रोड, कानपुर के संयुक्त तत्वाधान में “Role of Artificial Intelligence in Governance : Problems and Prospects” (शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका: समस्याएँ एवं सम्भावनाएँ) विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो० अरविन्द कुमार दीक्षित पूर्व कुलपति डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा, ब्रह्मानन्द कॉलेज के प्राचार्य प्रो० विवेक द्विवेदी, आई०आई०पी०ए०, कानपुर के सचिव डॉ० जी०एल० श्रीवास्तव के द्वारा दीप प्रज्जवलन कर किया गया।

उद्घाटन के उपरान्त भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, कानपुर ब्रांच के सचिव डॉ० जी०एल० श्रीवास्तव ने संगोष्ठी में आए हुए सभी मंचाशीन अतिथियों, विद्वतजनों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ए आई आधुनिक शासन व्यवस्था को अधिक दक्ष, पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बनकर आज सामने आया है। ए०आई० यह बड़े डेटा के विश्लेषण, स्वचालन और निर्णय समर्थन के माध्यम से सरकारों, प्रशासनिक अधिकारियों को बेहतर नीतियाँ बनाने और जनता को अच्छी सेवाएँ प्रदान करने में सहायता करती है। प्रमुख रूप से इसका बेहतर उपयोग, नीति निर्माण, सार्वजनिक सेवा प्रणाली, प्रशासनिक दक्षता, भ्रष्टाचार निवारण, आपदा प्रबन्धन एवं सुरक्षा और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में किया जा सकता है। परन्तु इससे सम्बन्धित कुछ समस्याएँ भी हैं जैसेः- आँकड़ों की गोपनीयता, पक्षपात होने, जवाबदेही की कमी, रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव, उच्च लागत एवं अवसंरचना की कमी आदि है।
यदि सही नीतियों, नैतिक मानकों के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता को उपयोग में लाया जाय तो यह भविष्य में सुशासन (Good Governance) का एक शक्तिशाली उपकरण बन सकता है। आज चैट जी०पी०टी० का उपयोग प्रत्येक क्षेत्र में अधिकांश लोगों द्वारा किया जा रहा है।
इसी उद्देश्य से आज की संगोष्ठी का विषय ‘शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका : समस्याएँ एवं सम्भावनाएँ’ रखा गया है। भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली के क्रियाकलाप तथा उद्देश्यों के सम्बन्ध में सभागार में उपस्थित सभी लोगों को सचिव डॉ० जी०एल० श्रीवास्तव द्वारा विस्तृत रूप से अवगत कराया गया।
विशिष्ट अतिथि पी०पी०एन० कॉलेज के प्राचार्य डॉ० अनूप कुमार सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सम्भावनाओं पर बहुत सरल ढंग से अपनी बात रखी। वही मुख्य अतिथि प्रो० अरविन्द कुमार दीक्षित पूर्व कुलपति, डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय आगरा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग सोच समझकर तथा नैतिकता के साथ ही किया जाना चाहिए।
कार्यशाला में विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ० राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के डॉ० अमन दीप सिंह ने पावर प्वाइंट प्रजेन्टेशन के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर विस्तृत चर्चा की।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय की फैकल्टी डॉ० अंशु सिंह ने अपने विचार रखे तथा उसके उपयोग में आने वाली समस्याएँ एवं सम्भावनओं पर चर्चा की।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वी०एस०एस०डी० कॉलेज के विधि विभाग के प्रो० ए०बी० जायसवाल ने अपने विचार व्यक्त किए।
आई०आई०पी०ए० कानपुर ब्रांच के वाइस चेयरमैन सी०ए० विनय जैन ने अपना सारगामित शोधपत्र प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ब्रह्मानन्द कॉलेज के प्राचार्य प्रो० विवेक द्विवेदी ने कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता का युग है। जिसका उपयोग प्रशासनिक कार्यों में लगभग सभी अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है।
कार्यशाला के सहसंयोजक ब्रह्मानन्द कॉलेज, कानपुर के विधि विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो० वी०एस० त्रिपाठी ने कार्यशाला में आए हुए सभी अतिथियों प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस कार्यशाला का संचालन श्रीमती निधि त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के कार्यकारिणी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो० आर०के० त्रिवेदी, कोषाध्यक्ष प्रो० राजेश कुमार तिवारी, डॉ० विभा दीक्षित, डॉ० प्रभा गुप्ता, डॉ० कपिल बाजपेयी एवं ब्रह्मानन्द कॉलेज के प्रो० पी०के० पाण्डेय, प्रो० नवनीत सिंह, प्रो० सुनील सिंह, प्रो० अनोखे लाल पाठक, प्रो० रीता अवस्थी, प्रो० वाई०ए० रूमी, डॉ० ओमेन्द्र सिंह, डॉ० शैलेन्द्र कुमार, डॉ० अमित कुमार, श्री शम्भू कुमार, श्री गौरव कुमार, श्रीमती प्रतिष्ठा सक्सेना एवं श्री शिवम सिंह यादव इत्यादि उपस्थित रहे।





